Wednesday, March 10, 2010

Woman Bill

Whats that hell is going on this wome n bill.भैया  हमारी अर्धान्गीय हमसे अपने ५० प्रतिशत के अगेंस्ट ३३ प्रतिशत ही मांग रही हे . कितनी अजीब बात हे की १४ वर्षो तक हमने इन दुर्गाओं को बहला कर रखा  और अब भी हमारी नियत साफ़ नहीं लगती . क्या यह शर्मनाक नहीं हैं .

Friday, February 19, 2010

Thursday, January 7, 2010

क्या अगली सदी तक लुप्त् हो जाएंगी नदियां

क्या अगली सदी तक लुप्त् हो जाएंगी नदियां


पूरी दुनिया में बदलते पर्यावरण से चिंतित पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओ   का मानना है कि हिमालयी ग्लेशियर जिस तेजी से पिघल रहे हैं, उससे आने वाले दिनों में हिमालय से निकलने वाली नदियों के जल प्रवाह में न केवल जबरदस्त कमी आएगी, बल्कि अगली सदी तक नदियां लुप्त् हो जाएंगी। अहमदाबाद के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के वैज्ञानिक तथा ग्लेशियर विशेषज्ञ डॉ. एवी कुलकर्णी के नेतृत्व में वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के एक दल ने करीब ७ वर्षोंा तक हिमालय के विभिन्न ग्लेशियरों की स्थिति का अध्ययन करने के बाद गत जून में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी है । उत्तराखंड के माणा गांव के निवासी ने बताया कि उन्होंने १५ वर्ष की उम्र में पहली बार सतोपंथ का ग्लेशियर देखा था। उस समय सतोपंथ झील एकदम ऊपर थी और चक्रतीर्थ से मात्र आधे घंटे में ही झील के मुहाने पर पहंुचा जा सकता था, लेकिन पिछले साल वे अपने परिवार के साथ जब सतोपंथ गए तो उन्होंने देखा कि झील लगभग ५० मीटर नीचे चली गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले ४ दशकों में हिमालयी राज्यों के ग्लेशियरों में जबरदस्त कमी आई है । रिपोर्ट के अनुसार केवल उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की १० प्रमुख नदियों में जल आपूर्ति के प्रमुख स्त्रोत ग्लेशियरों का क्षेत्रफल वर्ष १९६२ से २००४ के बीच करीब १६ फीसदी कम हुआ है । उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के पास से निकलने वाली गंगा की प्रमुख सहायक नदी अलकनंदा के आसपास के १२६ ग्लेशियरों का अध्ययन करने के बाद यह तथ्य सामने आया है कि ग्लेशियरोंके क्षेत्रफल में गिरावट आई है । श्री कुलकर्णी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ४ दशक पहले अलकनंदा के पास के ग्लेशियरों का कुल रकबा ७६४ वर्ग किलोमीटर था, जो अब घटकर ४३८ वर्ग किलोमीटर रह गया है । इसी तरह गंगा की प्रमुख धारा भागीरथी के पास के १८७ ग्लेशियरों का १२१८ वर्ग किलोमीटर का दायरा अब घटकर १०७४ वर्ग किलोमीटर हो गया है। पिछले ४० वर्षोंा में भागीरथी के १४४ वर्ग किलोमीटर के ग्लेशियर पिघल गए हैं। उत्तराखंड की धौली और गौरी गंगा नदियों की स्थिति भी खराब है ।